Sunday, May 10, 2026

पिछले एक हजार वर्षों में सोमनाथ मंदिर पर अनेक आक्रमण हुए और हर बार श्रद्धालुओं की अटूट आस्था, त्याग और बलिदान ने इसका पुनर्निर्माण किया। आज़ादी के बाद सोमनाथ मंदिर सरदार पटेल के प्रयासों से पुनर्स्थापित हुआ, जिसमें के.एम. मुंशी और जामसाहेब का अतुल्य योगदान रहा।

आज सोमनाथ भारत की संस्कृति और विरासत की प्रतीक बनकर उभरा है और भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक शक्ति से विश्व को परिचित करा रहा है।




 संपूर्ण देश में सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के 1000 वर्षों के स्मरणोत्सव के रूप में कलश यात्रा, भजन संध्या, स्वच्छता अभियान, ॐकार मंत्र का जाप, सोमनाथ संकल्प प्रतिज्ञा, मंत्र लेखन और सोमनाथ से जुड़ी कथाओं का वाचन जैसे विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं। आप भी अपने नगर में आयोजित इन कार्यक्रमों में भाग लीजिये और अपने देश की प्राचीन विरासत पर गर्व कीजिये।




#सोमनाथ आणि महाराष्ट्राचे नाते हे केवळ भूगोलाचे नाही, तर इतिहास, श्रद्धा, स्वाभिमान आणि पुनरुत्थानाच्या अखंड परंपरेचे आहे. पुण्यश्लोक राजमाता अहिल्यादेवी होळकर यांच्या पासून मराठा साम्राज्यापर्यंत अनेकांनी सोमनाथच्या पुनर्बांधणीसाठी दिलेले योगदान हे भारतीय संस्कृतीच्या अढळ सामर्थ्याचे प्रतीक आहे. सोमनाथ मंदिराच्या पुनरुज्जीवनाला 75 वर्षे पूर्ण होत असताना, मा. पंतप्रधान नरेंद्र मोदीजी यांच्या नेतृत्वात संपन्न होणाऱ्या 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व 2026' च्या निमित्त 'सोमनाथ – अखंड श्रद्धेचे महापर्व' या माझ्या लेखातून सोमनाथचा गौरवशाली प्रवास नक्की वाचा.




 

पिछले एक हजार वर्षों में सोमनाथ मंदिर पर अनेक आक्रमण हुए और हर बार श्रद्धालुओं की अटूट आस्था, त्याग और बलिदान ने इसका पुनर्निर्माण किया। आज़ा...